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मत छेड़ मुझे

मत छेड़ मुझे    मैं लाल हूँ और मेरा रंग भी लाल है । मुझे छेडने कि हिम्मत् मत कर । यदि तूं मुझे छेडेगा तो इस बात की चर्चा संसद तक होगी और तू बच नहीं पाएगा ऐ आम इन्सान । हां तुम सही समझे हो, मैं टमाटर ही हूं । इस समय मेरा तुम्हारी सब्जी में न होना तुम्हे खल तो जरूर रहा होगा लेकिन इसमें मेरा कोई कसूर नहीं है और न ही उस गरीब किसान का कोई कसूर है जिसने मुझे पैदा किया।     अब तुम सोच रहे होंगे कि तो फिर कसूर किसका है । भाई मैं तुम्हे बता देता हूं कि एक डायन ये सभी काम कर रही है जिसने मुझे तुमसे दूर किया है। बहुत उतावले होंगे न नाम जानने को, यह भी सोच रहे होंगे कि मैं उसे मार दूंगा तो भाई ये भी बता देता हूं कि उसे आज तक कोई नहीं मार सका । चलो जल्दी से उस डायन का नाम बताता हूं पहले जरा अपने जीगर पर हाथ रख लो, वह डायन है मंहगाई ।      हर वर्ष सरकार को भी इसी बात की चिन्ता रहती है कि अगर ये डायन मर जाए तो हमारी वाह वाही हो जाएगी । वे चाह कर भी ऐसा न कर सकीं । चलो इसका ज्वाब समय पर छोड देता हूं शायद वह कुछ कर सके ।