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किसान कभी उग्र नहीं होता (Kisan Kabhi Ugra Nahi Hota)

किसान   कभी   उग्र   नहीं   होता   किसान   कभी   उग्र   नहीं   होता क्या   ज़रूरत   है   किलेबंदी   की   बेवजह   सड़क   पर   बैरिकेड,   जमाबंदी   की   क्योंकि   किसान   कभी   उग्र   नहीं   होता   किसान   उग्र   होता   है   जब पकी   फ़सल   पर   बरसात   हो मेहनत   पर   फिर   जाए   पानी   और   ख़त्म   उसके   जज़्बात   हों   किसान   उग्र   होता   है   जब   पकी   हुई   गेहूं   में   लग   जाती   है   आग नहीं   बुझती   फिर   क़र्ज़दाता   की   प्यास   किसान   उग्र   होता   है   जब   पड़   जाए   सूखा   फिर   चाहे   पशु   हो   या   परिवार   सोना   पड़   सकता   है   भूखा किसान   उग्र   होता ...
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चटनी (सरकार) को लेकर पिछले कई दिनों से ही टमाटर व प्याज में बहस छिड़ी हुई थी। टमाटर (पायलट) कहता है कि मेरे बिना तुम्हारा कोई वजूद नहीं है, मेरे बिना चटनी (सरकार) बन ही नहीं सकती। प्याज (गहलोत) इस बात पर अड़ा रहा कि सब कुछ मैं ही हूँ। धनिया, पुदीना, नमक, हरी मिर्च (बाकि के एमएलए) यह सब देख सुन रहे थे और सोच रहे थे कि हम कहां जाए। इन सब के बिना भी तो चटनी बन नहीं सकती। चटनी को यह भी सोचना चाहिए था कि अब तक तो सब ठीक था जब तक नींबू (बीजेपी) नहीं डला था। नींबू के आने के बाद चटनी में बाकि सब के स्वाद फीके हो गए। चटनी(सरकार) लगभग खत्म सी हो गई। यहां लोगों को भी यह समझना चाहिए कि कोई भी चटनी (सरकार) लम्बे समय तक रहने से खराब हो जाती है उसका स्वाद कसैला हो जाता है तो ऐसे में समय मिलते ही नई चटनी (सरकार) बनाने के बारे में सोचना चाहिए ताकि जायका बना रहे।

शराब को कोई दोष न देना और न ही शराबियों को

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कोरोना काल में जब देश की अर्थव्यवस्था चरमरा रही है ऐसे में देश की अर्थव्यवस्था को पहिए लगाने के लिए यदि सरकार ने शराब, शराबियों को उपलब्ध करवा ही दी तो इसमें हाहाकार मचाने की क्या जरूरत है?        आज हम यह जान लें कि एक ही दिन में राज्य सरकारें कितने की दारू बेचने में सफल हुई हैं । सबसे पहले महाराष्ट्र को लेते हैं, महाराष्ट्र में 11 करोड़ रुपये व उत्तर प्रदेश में लगभग 100 करोड़ रुपये की शराब बिकी व और हरियाणा लगभग 3000 करोड़ के मासिक रिवेन्यू की हानि सहन कर रहा है।       चलिए थोड़ी सी बात कर लेते हैं कोरोना की इस समय पूरे भारतवर्ष में 50,000 के कोरोना के केस सामने आ चुके हैं और अकेले महाराष्ट्र में यह संख्या 15000 से ऊपर है शराब की बिक्री को लेकर मीडिया व सोशल मीडिया में अलग-अलग तरह से लोग अपने मत को प्रकट कर रहे हैं लेकिन यह ध्यान रखने योग्य बात है कि शराब का करोना से कोई संबंध नहीं है हां यह बात जरूर है कि जमातियों, नांदेड़ साहब व शराबियों की जमात करोना के प्रसार में अहम भूमिका निभा (सकते) रहे हैं।       लगभग 45 दिन के लोकडाउन...

Book Review: Haryana main Satta ki Rajniti

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लेखक: डॉ भीम सिंह दहिया अनुवादक: डॉ सुभाष चन्द्र अमेज़न प्राइज : 351₹ हरियाणा की राजनीति में शुरू से ही जाति व्यवस्था रही है, इस बात के साक्ष्य सन 1916 में चौधरी छोटूराम द्वारा प्रकाशित सप्ताहिक पत्र 'जाट-गजट' व पंडित श्रीराम शर्मा द्वारा 1923 में प्रकाशित 'हरियाणा तिलक' के रूप में मिलते हैं। हरियाणा में जाति आधारित राजनीति अपने प्रगाढ़ रूप में देखने को मिलती है लेकिन जब हम अपने बच्चे को स्कूल या ट्यूशनभेजते समय अध्यापक की जाति नहीं उसकी योग्यता, ईमानदारी, निष्ठा देखते हैं वहीं इलाज कराने के लिए जाने से पहले डॉक्टर की जाति नहीं बल्कि उसका ज्ञान देखते हैं तो क्या यह सोचने की बात नहीं है कि वोट देने से पहले नेता की जाती क्यों देखते हैं? इन सवालों का जवाब इस बहु प्रतिष्ठित किताब "हरियाणा में सत्ता की राजनीति: जाति और धन का खेल में मिलते हैं। हरियाणा में राजनीति की शुरुआत में दो ही पार्टियां थीं जिनमें यूनियनिस्ट पार्टी व कांग्रेस पार्टी का नाम सामने आता है। सन 1923 में युनियनिस्ट पार्टी के चौधरी छोटूराम ने पंजाब के समूचे किसान वर्ग को संगठित करने का बीड़ा उठ...

Patrol vs Diesel

मोदी सरकार द्वारा एक साजिश के तहत पेट्रोल व डीजल के दाम एक बराबर कर दिए गए हैं। गौरतलब है कि उड़ीसा में डीजल के दाम पेट्रोल के पार हो गए हैं। यह न केवल देश हित में है बल्कि पर्यावरण प्रदूषण को देखते हुए मोदी सरकार द्वारा पेट्रोल डीजल के दाम बराबर कर दिए गए हैं, न केवल बराबर कर दिए गए हैं बल्कि डीजल के दाम पेट्रोल से बढ़ा दिए गए हैं । इससे पेट्रोल से चलने वाली गाड़ियां की मांग बढ़ जाएगी क्योंकि पेट्रोल की गाड़ियां डीजल की गाड़ियों की अपेक्षा लाख डेढ़  लाख सस्ती होती है और पर्यावरण के लिए भी अच्छी होती है। जबकि डीजल  की गाड़ियां लाख,डेढ़ लाख रुपए ज्यादा होती ज्यादा महंगी होती है और पर्यावरण के लिए भी खतरनाक साबित होती हैं। अब किसान भी खेतों में डीजल के ट्रैक्टर अपेक्षा पेट्रोल के ट्रैक्टर चलाएंगे जिससे पर्यावरण की सुरक्षा होगी क्योंकि  पहले ही किसान पराली जला कर भी देश व पर्यावरण  का नुकसान कर रहे हैं। अतः डीजल से चलने वाली रेलगाड़ियां बंद होकर पेट्रोल बिजली से चलने लगेगी जिससे पर्यावरण की सुरक्षा होगी और देश तरक्की की ओर अग्रसर होगा। आपसे विनम्र निवेदन है कि आप मोदी ...

All characters of this film/serial

सावधान इस फिल्म के सभी पात्र व घटनाएं काल्पनिक है इसका वास्तविक जीवन से कोई संबंध नहीं है आजकल सभी फिल्मों नाटकों  के शुरुआत में इस प्रकार के स्लोगन दिखाई देते हैं। लेकिन दर्शक इस बात को नजरअंदाज करते हुए इन फिल्मों व नाटकों से अपनी वास्तविक जिंदगी को बिगाड़ लेते हैं । दरअसल मैं हैदराबाद की एक घटना के बारे में बात करना चाहता हूं इस घटना में एक महिला ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर अपने पति को मौत के घाट उतार दिया । और अपने प्रेमी का चेहरा तेजाब से जला दिया ताकि लोग उसको ही उसका पति समझे । न केवल तेजाब से उसका चेहरा जलाया बल्कि प्लास्टिक सर्जरी से उसका चेहरा ठीक  करवाने की कोशिश भी की लेकिन आधार कार्ड के फिंगर प्रिंट से सारा मामला शक के दायरे में आ गया जिससे उस व्यक्ति की मां ने पहचान लिया तब महिला ने कहा कि वह तेलुगु फिल्म "येवाडु"को देखकर सारी साजिश रची थी ऐसी ही एक घटना  आज कल नोएडा  में देखने को मिलती है जिसमें एक लड़का अपनी मां व बहन की क्रिकेट के बैट से हत्या कर देता है और ना जाने कितनी घटनाएं ऐसे ही Crime Patrol व फिल्मों से संबंधित वास्तविक जीवन में देखने को मिलत...
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सारी दुनिया पानी भर रही है! चौंकीदार - पीआॅन का पीआॅन - क्लर्क का क्लर्क - हैड क्लर्क का हैड क्लर्क- आॅफिसर का आॅफिसर - सीनियर आॅफिसर का सीनियर आॅफिसर - ब्रांच आॅफिसर का ब्रांच आॅफिसर- हैड आॅफिसर का हैड आॅफिसर- मेन आॅफिसर का मेन आॅफिसर- मंत्री का मंत्री- सरकार का और नतीजा॰॰॰॰॰॰॰ "स्कूल में कैंप --बच्चे बाहर  कालेज में प्रोग्राम--बच्चे कक्षा से बाहर  युनिवर्सिटी में ईवंट-- बच्चे व शिक्षक सभी सरकारी देख रेख में " अधिकतर कर्मचारी इन सभी ड्यूटी पर जैसे- वोट बनवाना, शौच को देखना आदि  और बाकी जो रह गया वो है 'विकास' ----रोशन मस्ताना