swine flu introduction
स्वाइन फ्लू
H1N1 वायरस का फैलाव सबसे ज्यादा अंर्तराष्ट्रीय यात्राओं के जरिए हुआ।1 रायटर्स ने अपनी रिर्पोट में कहा है कि भारत में बहुत बडी संख्या में स्वाईन फ्लू केस सामने आए और सैंकडों की संख्या में लोगों ने जान भी गर्वाइं। 20 फरवरी 2015 को पत्रकार वार्ता के दौरान स्वास्थ्य अधिकारी अरूण कुमार पाण्डे ने यह जानकारी दी की H1N1 वायरस से 1 जनवरी से 12 फरवरी तक 485 लोगों की मौत हुई। अमेरिका के Central for disease control And prevention के मुताबिक H1N1 वायरस ने भारत सहित 74 देशों में अपने पैर पसारे जिससे विश्व में 284000 लोगों को इस महामारी में जान गवानी पड़ी। मैक्सिकों में स्वाइन फ्लू का पहला मामला 27 अप्रैल को सामने आया था।2
मीडिया ने लोगों में स्वाइन फ्लू को लेकर जागरूकता फैलाने का काम किया। बहुत से लोगों में स्वाइन फ्लू को लेकर डर का भाव था। मीडिया ने हर रोज बढ़ रहे अफवाओं के बाजार को भी शांत किया मीडिया को हम कई तरह से जान सकते है जैसे कि प्रिंट मीडिया, इलैक्ट्रोनिक मीडिया, न्यू मीडिया। मिडिया ने स्वाइन फ्लू के प्रति जागरूक करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए व समय-समय पर सही जानकारी उपलब्ध करवाई ।
भारतीय समाचार पत्रों के द्वारा 1 जनवरी से लेकर 10 फरवरी 2015 तक स्वाइन फ्लू के कवरेज की रिपोर्ट प्रस्तुत है।
स्वाइन फ्लू के आंकडे
H1N1 वायरस ने 2009 से 2015 तक खासा नुकसान पहुंचाया ‘द गार्डियन’’ एक वरिष्ठ अखबार में छपी खबर के अनुसार फरवरी 2015 में H1N1 वायरस को महामारी का शिकार होने वाले राज्यों में गुजरात सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ। गुजरात सरकार नेे ज्यादा लोगों के़े इकट्ठे होने पर बैन लगा दिया। गुजरात में 231 लोगों कि जान गई थी वहीं राजस्थान में 234 लोगों की मौत हुई थी।3
मीडिया ने आम जनमानस तक इसके उपचार के वैज्ञानिक तरीकों की जानकारियों को लोगों तक पहुंचाया। यूके में 2009-10 में सबसे ज्यादा स्वाइन फ्लू के मामले देखे गए। स्वास्थ्य सम्बन्धी मुद्दों को लेकर मीडिया लोगों को जागरूक कर रहा है और उनसे बचने के उपाय भी लोगों तक पहुंचा रहा है।
भारत में 1 जनवरी से 11 मार्च 2015 तक कुल 27,234 मामले सामने आए है जिनमें से 1537 व्यक्ति मृत्यु का शिकार हुए।4
H1N1 वायरस का फैलाव सबसे ज्यादा अंर्तराष्ट्रीय यात्राओं के जरिए हुआ।1 रायटर्स ने अपनी रिर्पोट में कहा है कि भारत में बहुत बडी संख्या में स्वाईन फ्लू केस सामने आए और सैंकडों की संख्या में लोगों ने जान भी गर्वाइं। 20 फरवरी 2015 को पत्रकार वार्ता के दौरान स्वास्थ्य अधिकारी अरूण कुमार पाण्डे ने यह जानकारी दी की H1N1 वायरस से 1 जनवरी से 12 फरवरी तक 485 लोगों की मौत हुई। अमेरिका के Central for disease control And prevention के मुताबिक H1N1 वायरस ने भारत सहित 74 देशों में अपने पैर पसारे जिससे विश्व में 284000 लोगों को इस महामारी में जान गवानी पड़ी। मैक्सिकों में स्वाइन फ्लू का पहला मामला 27 अप्रैल को सामने आया था।2
मीडिया ने लोगों में स्वाइन फ्लू को लेकर जागरूकता फैलाने का काम किया। बहुत से लोगों में स्वाइन फ्लू को लेकर डर का भाव था। मीडिया ने हर रोज बढ़ रहे अफवाओं के बाजार को भी शांत किया मीडिया को हम कई तरह से जान सकते है जैसे कि प्रिंट मीडिया, इलैक्ट्रोनिक मीडिया, न्यू मीडिया। मिडिया ने स्वाइन फ्लू के प्रति जागरूक करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए व समय-समय पर सही जानकारी उपलब्ध करवाई ।
भारतीय समाचार पत्रों के द्वारा 1 जनवरी से लेकर 10 फरवरी 2015 तक स्वाइन फ्लू के कवरेज की रिपोर्ट प्रस्तुत है।
स्वाइन फ्लू के आंकडे
H1N1 वायरस ने 2009 से 2015 तक खासा नुकसान पहुंचाया ‘द गार्डियन’’ एक वरिष्ठ अखबार में छपी खबर के अनुसार फरवरी 2015 में H1N1 वायरस को महामारी का शिकार होने वाले राज्यों में गुजरात सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ। गुजरात सरकार नेे ज्यादा लोगों के़े इकट्ठे होने पर बैन लगा दिया। गुजरात में 231 लोगों कि जान गई थी वहीं राजस्थान में 234 लोगों की मौत हुई थी।3
मीडिया ने आम जनमानस तक इसके उपचार के वैज्ञानिक तरीकों की जानकारियों को लोगों तक पहुंचाया। यूके में 2009-10 में सबसे ज्यादा स्वाइन फ्लू के मामले देखे गए। स्वास्थ्य सम्बन्धी मुद्दों को लेकर मीडिया लोगों को जागरूक कर रहा है और उनसे बचने के उपाय भी लोगों तक पहुंचा रहा है।
भारत में 1 जनवरी से 11 मार्च 2015 तक कुल 27,234 मामले सामने आए है जिनमें से 1537 व्यक्ति मृत्यु का शिकार हुए।4
1.
Hilton Shona, Hunt Kate (2009) UK
newspapers' representations of the 2009—10 outbreak of swine flu: one health
scare notover-hyped by the media?
2.
Department of Health, (2007) National
framework for responding to an influenza pandemic. London: COI.
3.
The guardian, 26 February 2015
4.
Times of India, 13 march 2015 E
newspaper
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