Honeymoon with Rahul and 48 others
आजकल फेसबुक पर विद् यानि टैगिंग का दौर जोरों पर है । हर कोई अपने आप को ज्यादा फेमस करने व ज्यादा लाइक्स के चक्कर में विद् यानि अदर्स के साथ है । कोई पिकनिक मनाने गया है तो पिकनिक विद् 42 अदर्स, कोई अपना बर्थडे मना रहा है तो बर्थडे विद् अदर्स, कोई खाना खा रहा है तो ईटिंग विद् अदर्स, और हद तो तब हो जाती है जब हनिमून पर गए हो ओर टैग करते है हनिमून विद् राहुल एण्ड 48 अदर्स।
ओर गलती से किसी के मरने की कोई खबर फेसबुक पर अपलोड कर दे तो डेरों लाइक्स कर देतें है वे लाइक् करते हुए यह नहीं सोचते कि वे क्या कर रहें हैं या ज्यादा से ज्यादा RIP ( Rest in piece ) लिख देते हैं और ये नहीं सोचते कि इसका मतलब क्या है ? मतलब मरने वाले को दफनाया गया है और क्यामत के दिन वो खुदा से मिल जाएगा । अब परश्न ये है कि मरने वाले को यदि जलाया गया हो तो, तो मुसीबत की अब क्या लिखे, लाइक् कर दें क्या ? नहीं नहीं हम ओम् शांति, वाहेगुरू, जय राम आदि संमबोधन कर सकते है ।
कई बार फेसबुक पर हम किसी ऐसे फोटो को देखते हैं जिसमें दर्द, व किसी घटना में कोई चोट लग गई हो या किसी अंजान बच्चे की मृत्यु पर हम आमीन लिख देते है तो क्या हमारी संवेदना केवल आमीन से ही व्यक्त हो सकती है ?
यह जरूरी है कि हर फेसबुक युजर् को बडी ईमानदारी से व समय निकाल कर ईसका इस्तेमाल करना चाहिए । क्या मीडिया लिट्रेसी को अनिवार्य विषय नहीं बनाना चाहिए । लेकिन पुरे समाज को तो मीडिया लिट्रेसी नहीं पढ़ाया जा सकता । हमें समय और परिवर्तन का इंतजार करना होगा ?
ओर गलती से किसी के मरने की कोई खबर फेसबुक पर अपलोड कर दे तो डेरों लाइक्स कर देतें है वे लाइक् करते हुए यह नहीं सोचते कि वे क्या कर रहें हैं या ज्यादा से ज्यादा RIP ( Rest in piece ) लिख देते हैं और ये नहीं सोचते कि इसका मतलब क्या है ? मतलब मरने वाले को दफनाया गया है और क्यामत के दिन वो खुदा से मिल जाएगा । अब परश्न ये है कि मरने वाले को यदि जलाया गया हो तो, तो मुसीबत की अब क्या लिखे, लाइक् कर दें क्या ? नहीं नहीं हम ओम् शांति, वाहेगुरू, जय राम आदि संमबोधन कर सकते है ।
कई बार फेसबुक पर हम किसी ऐसे फोटो को देखते हैं जिसमें दर्द, व किसी घटना में कोई चोट लग गई हो या किसी अंजान बच्चे की मृत्यु पर हम आमीन लिख देते है तो क्या हमारी संवेदना केवल आमीन से ही व्यक्त हो सकती है ?
यह जरूरी है कि हर फेसबुक युजर् को बडी ईमानदारी से व समय निकाल कर ईसका इस्तेमाल करना चाहिए । क्या मीडिया लिट्रेसी को अनिवार्य विषय नहीं बनाना चाहिए । लेकिन पुरे समाज को तो मीडिया लिट्रेसी नहीं पढ़ाया जा सकता । हमें समय और परिवर्तन का इंतजार करना होगा ?

sir ye sb smaj se suru hua h or ise khtm krne ke ly bi hmse se hi kisi ek ko phele krni hogi tbi in social site ka shi use ho skega abi to ye family album ka kam hr rhi h bs
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