शराब को कोई दोष न देना और न ही शराबियों को

कोरोना काल में जब देश की अर्थव्यवस्था चरमरा रही है ऐसे में देश की अर्थव्यवस्था को पहिए लगाने के लिए यदि सरकार ने शराब, शराबियों को उपलब्ध करवा ही दी तो इसमें हाहाकार मचाने की क्या जरूरत है? 


      आज हम यह जान लें कि एक ही दिन में राज्य सरकारें कितने की दारू बेचने में सफल हुई हैं । सबसे पहले महाराष्ट्र को लेते हैं, महाराष्ट्र में 11 करोड़ रुपये व उत्तर प्रदेश में लगभग 100 करोड़ रुपये की शराब बिकी व और हरियाणा लगभग 3000 करोड़ के मासिक रिवेन्यू की हानि सहन कर रहा है।
      चलिए थोड़ी सी बात कर लेते हैं कोरोना की इस समय पूरे भारतवर्ष में 50,000 के कोरोना के केस सामने आ चुके हैं और अकेले महाराष्ट्र में यह संख्या 15000 से ऊपर है शराब की बिक्री को लेकर मीडिया व सोशल मीडिया में अलग-अलग तरह से लोग अपने मत को प्रकट कर रहे हैं लेकिन यह ध्यान रखने योग्य बात है कि शराब का करोना से कोई संबंध नहीं है हां यह बात जरूर है कि जमातियों, नांदेड़ साहब व शराबियों की जमात करोना के प्रसार में अहम भूमिका निभा (सकते) रहे हैं।
      लगभग 45 दिन के लोकडाउन में भारत के अधीक्षक शराबी, शराब छोड़ने ही वाले थे कि ऐन समय पर सरकार ने सोचा कि अगर शराबी, शराब छोड़ देंगे तो हम देश की अर्थव्यवस्था कैसे संभाल पाएंगे बल्कि कानून व्यवस्था की भी शायद जरूरत ना रहे क्योंकि अधिकतर अपराध शराब के सेवन के बाद ही होते हैं ऐसा तथ्यों से पता चलता है। तो इस तरह से पुलिस विभाग का रिवेन्यू भी खत्म होता हुआ महसूस होता है।
चलते चलते शराब के अर्थ को भी जान लेते हैं
श=शराफत गई
रा= रहमत गई
ब=बरकत गई
अगली बार फिर मिलते हैं किसी नई कहानी के साथ।


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