चटनी (सरकार) को लेकर पिछले कई दिनों से ही टमाटर व प्याज में बहस छिड़ी हुई थी। टमाटर (पायलट) कहता है कि मेरे बिना तुम्हारा कोई वजूद नहीं है, मेरे बिना चटनी (सरकार) बन ही नहीं सकती। प्याज (गहलोत) इस बात पर अड़ा रहा कि सब कुछ मैं ही हूँ।
धनिया, पुदीना, नमक, हरी मिर्च (बाकि के एमएलए) यह सब देख सुन रहे थे और सोच रहे थे कि हम कहां जाए। इन सब के बिना भी तो चटनी बन नहीं सकती। चटनी को यह भी सोचना चाहिए था कि अब तक तो सब ठीक था जब तक नींबू (बीजेपी) नहीं डला था। नींबू के आने के बाद चटनी में बाकि सब के स्वाद फीके हो गए। चटनी(सरकार) लगभग खत्म सी हो गई। यहां लोगों को भी यह समझना चाहिए कि कोई भी चटनी (सरकार) लम्बे समय तक रहने से खराब हो जाती है उसका स्वाद कसैला हो जाता है तो ऐसे में समय मिलते ही नई चटनी (सरकार) बनाने के बारे में सोचना चाहिए ताकि जायका बना रहे।
सारी दुनिया पानी भर रही है! चौंकीदार - पीआॅन का पीआॅन - क्लर्क का क्लर्क - हैड क्लर्क का हैड क्लर्क- आॅफिसर का आॅफिसर - सीनियर आॅफिसर का सीनियर आॅफिसर - ब्रांच आॅफिसर का ब्रांच आॅफिसर- हैड आॅफिसर का हैड आॅफिसर- मेन आॅफिसर का मेन आॅफिसर- मंत्री का मंत्री- सरकार का और नतीजा॰॰॰॰॰॰॰ "स्कूल में कैंप --बच्चे बाहर कालेज में प्रोग्राम--बच्चे कक्षा से बाहर युनिवर्सिटी में ईवंट-- बच्चे व शिक्षक सभी सरकारी देख रेख में " अधिकतर कर्मचारी इन सभी ड्यूटी पर जैसे- वोट बनवाना, शौच को देखना आदि और बाकी जो रह गया वो है 'विकास' ----रोशन मस्ताना

Political Stire...very nice
ReplyDeleteVery nice,wow!
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