किसान कभी उग्र नहीं होता (Kisan Kabhi Ugra Nahi Hota)

किसान कभी उग्र नहीं होता 


किसान कभी उग्र नहीं होता

क्या ज़रूरत है किलेबंदी की 

बेवजह सड़क पर बैरिकेड, जमाबंदी की 

क्योंकि 

किसान कभी उग्र नहीं होता 


किसान उग्र होता है जब

पकी फ़सल पर बरसात हो

मेहनत पर फिर जाए पानी 

और ख़त्म उसके जज़्बात हों 


किसान उग्र होता है जब 

पकी हुई गेहूं में 

लग जाती है आग

नहीं बुझती फिर 

क़र्ज़दाता की प्यास 


किसान उग्र होता है जब 

पड़ जाए सूखा 

फिर चाहे पशु हो या परिवार 

सोना पड़ सकता है भूखा


किसान उग्र होता है तब

अपने आप पर

या

अपनी बेबसी पर।




Comments

Post a Comment

Thank You for read my Blog

Popular posts from this blog

Book Review: Haryana main Satta ki Rajniti

मत छेड़ मुझे